परिश्रम किसे कहते हैं कोई इन भारतीय क्रिकेटर्स से पूछे, जिनका बचपन काफी गरीबी में गुजरा था…!

भारतीय टीम के तेज गेंदबाज उमेश यादव के पिता कोयले की खदान में मजदूर के तौर पर काम किया करते थे। यही कारण थी कि उमेश अपनी शुरुआती पढ़ाई सरकारी स्कूल में पूरी की। नौकरी ना मिलने पर उमेश यादव ने लोकल क्रिकेट टूर्नामेंट खेलना शुरू कर दिए। और 3 नवंबर 2008 में उमेश यादव का सिलेक्शन फर्स्ट क्लास क्रिकेट में हुआ।

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पिता अनिरुद्ध प्राइवेट सिक्योरिटी एजेंसी में वॉचमैन के तौर पर काम किया करते थे। आर्थिक स्थिति अच्छी ना होने के कारण से जडेजा के पिता चाहते थे वह इंडियन आर्मी में जॉब करे। किन्तु जडेजा को अपने आप पर पूरा भरोसा था और फिर जडेजा ने 2006 में अंडर-19 अपनी जगह बना ली।

उत्तर प्रदेश के एक छोटे से गांव में जन्मे मोहम्मद शमी के पिता तो तौसीफ अली एक किसान थे। शमी के पिता को क्रिकेट में रोचकता थी और वह चाहते थे कि उनका बेटा भारतीय टीम में सम्लित हो। यही कारण थी कि मोहम्मद शमी ने क्रिकेट में पूरी परिश्रम की और एक बड़ा मंजिल प्राप्त किया।

भारतीय टीम के युवा बल्लेबाज रोहित शर्मा जिनकी आर्थिक स्थिति काफी बेकार थी। जिसके कारण वह अपने दादी दादा के पास रहा करते थे। रोहित के खेल से प्रभावित होकर कोच दिनेश ने उनकी मदद की और आर्थिक मदद करते हुए दिनेश ने रोहित शर्मा को स्वामी विवेकानंद इंटरनेशनल स्कूल में करा दिया।

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