साप्ताहिक व्रत-त्योहार (20 To 26 April 2020): काफी खास है आने वाला सप्ताह, हर दिन होगा एक नया व्रत!

April Festival साप्ताहिक व्रत-त्योहार (20 To 26 April 2020): भगवान शिव शंभू के ‘प्रदोष व्रत’ के साथ नए सप्ताह की शुरुआत हो रही है। प्रदोष व्रत को हम सोम प्रदोष के नाम से भी जानते हैं। यह व्रत सोमवार यानि 20 अप्रैल को है। व्रतों की दृष्टि से यह सप्ताह काफी महत्वपूर्ण रहने वाला है। क्योंकि इस सप्ताह एक साथ 7 व्रत होने वाले हैं। जिनमें मासिक शिवरात्रि, वैशाख अमावस्या, अक्षय तृतीया, परशुराम जयंती, मासिक कार्तिगाई, रोहिणी व्रत भी शामिल हैं।

आइए हम जानते हैं कि इन प्रमुख व्रतों की तिथि के बारे में:

प्रदोष व्रत या सोम प्रदोष 

प्रदोष व्रत या सोम प्रदोष 20 अप्रैल यानि सोमवार को है। हर महीने की कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत रखा जाता है। इस व्रत को करने वाले भगवान शिव की पूजा करते हैं। प्रदोष व्रत शिव भक्तों के लिए काफी अहम होता है।

मासिक शिवरात्रि

मासिक शिवरात्रि 21 अप्रैल को है। जोकि मंगलवार के दिन पड़ रहा है। यह दिन भगवान महादेव और शिव भक्तों के लिए काफी महत्वपूर्ण होता है। आपको हम बता दें कि हर माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मासिक शिवरात्रि को मनाया जाता है

वैशाख अमावस्या

मंगलवार के बाद अब बुधवार को कोई व्रत नहीं है। अगला व्रत बृहस्पतिवार (गुरुवार) है। बृहस्पतिवार को वैशाख अमावस्या है। अमावस्या में चंद्रमा नहीं निकलता है। भारत में जिस दिन पूर्ण रूप से चंद्रमा को नहीं देखा जा सकता है वह दिन अमावस्या का दिन कहलाता है। हिंदू शास्त्रों में अमावस्या को काफी महत्वपूर्ण बताया गया है। हिंदू शास्त्र के अनुसार अमावस्या को पित्रों (पूर्वजों) का दिन दिन भी कहा गया है। कहा जाता है कि इस दिन स्नान कर भगवान का ध्यान करना चाहिए तथा गरीबों को भोजन कराना चाहिए। इससे पितृ दोष से मुक्ति मिलती है और पूर्वजों की आत्मा को शांति मिलती है।

मासिक कार्तिगाई दीपम

25 अप्रैल को शनिवार हैं। इन दिन ‘मासिक कार्तिगाई दीपम’ का पर्व है। मासिक कार्तिगाई तमिल हिन्दुओं का लोकप्रिय पर्व हैं। तमिल हिन्दुओं काफी श्रद्धा के साथ मासिक कार्तिगाई को मनाते हैं। पौराणिक कथा के अनुसार मासिक कार्थीगाई दीपम भगवान शिव के सम्मान में मनाया जाता है। कहा जाता है कि भगवान शिव ने भगवान विष्णु और ब्रह्मा जी को अपनी श्रेष्ठता साबित करने के लिए खुद को अनंत प्रकाश की ज्योति में बदल दिया था। लोग इस त्यौहार के दिन अपने घरों और गलियों में तेल के दिए जलाते हैं। जो पंक्तिबद्ध तरीके से सजाये जाते हैं। जिसे अदल-बदल भी किया जाता है। कृतिका नक्षत्र से कार्तिगाई दीपम का नाम लिया गया है। यानी जिस दिन कृतिका नक्षत्र प्रबल होता है उसी दिन इस त्यौहार को मनाया जाता है।

परशुराम जयन्ती

25 अप्रैल को ही परशुराम जयन्ती भी है। भगवान परशुराम का जन्म वैशाख शुक्ल पक्ष के तृतीया दिन प्रदोष काल में हुआ था। भगवान परशुराम को भगवान विष्णु का अवतार माना जाता है। परशुराम जयंती का हिंदू धर्म में काफी महत्व है। उन्हें साहस का प्रतीक माना जाता है। इसीलिए कहा जाता है कि भगवान परशुराम की पूजन से साहस बढ़ता है और भय से मुक्ति भी मिलती है।

अक्षय तृतीया

26 अप्रैल को अक्षय तृतीया का दिन है। अक्षय तृतीया रविवार के दिन पड़ रहा है। वैशाख शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को अक्षय तृतीया मनाया जाता है अक्षय तृतीया को काफी शुभ माना जाता है। कहा जाता है कि यह तिथि इतनी शुभ होती है कि इस दिन किसी मुहूर्त के देखे बिना भी शुभ कार्य को संपन्न किया जा सकता है।

रोहिणी व्रत

रविवार (26 अप्रैल) के दिन ही रोहिणी व्रत भी है। जैन समुदाय के लोगों में रोहिणी व्रत का काफी अहम स्थान है। कहा जाता है कि जैन धर्म की महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र के लिए रोहिणी व्रत रखती हैं।

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