Buddha Purnima 2020 Shubh Muhurat, Puja Vidhi: जानिए बुद्ध पूर्णिमा का महत्व, और रोचक बातें

Buddha Purnima 2020 Shubh Muhurat, Puja Vidhi: भारत त्योहारों का देश माना जाता है। भारत में कई सम्प्रदाय है। सभी सम्प्रदायों के लोग अपने अपने त्योहारों को बड़े ही धूमधाम से मनाते हैं। खास बात यह है कि अनेकता में एकता ही अनेकता की रीति चलाते हुए सभी संप्रदाय एक दूसरे सम्प्रदायों के त्योहारों और उनसे जुड़े हुए रीति-रिवाजों का आदर भी करते हैं। ऐसा ही एक त्यौहार बुद्ध पूर्णिमा भी है जिसे पूरे भारत में कई लोग मनाते हैं। बुद्ध को महात्मा की उपाधि दी गयी हैं क्योंकि उन्होंने शांति और अहिंसा का मार्ग चुना और मोक्ष प्राप्त किया।

महात्मा बुद्ध के जन्म दिवस के रूप में मनाई जाती है बुद्ध पूर्णिमा

बुद्ध पूर्णिमा के त्योहार को बौद्ध धर्म के साथ हिंदू धर्म और जैन धर्म भी काफी धूमधाम से मनाते है। मान्यताओं के अनुसार बुद्ध पूर्णिमा के दिन ही महात्मा बुद्ध का जन्म हुआ था। महात्मा बुद्ध के जन्म दिवस के उपलक्ष्य में ही बुद्ध पूर्णिमा को माना जाता है। महात्मा बुद्ध को लेकर विभिन्न धर्मों में विभिन्न मान्यताएं प्रचलन में है। हिंदू धर्म में महात्मा बुद्ध को भगवान विष्णु का अवतार माना जाता है जिसका जन्म पृथ्वी पर अहिंसा का प्रचार करने के लिए हुआ था। अतः हिन्दुओं के लिए भी बुद्ध पूर्णिमा का विशेष महत्व है।

बुद्ध पूर्णिमा के दिन ही हुआ था महात्मा बुद्ध का निर्वाण

बौद्ध धर्म के अनुसार मोक्ष प्राप्त करने की प्रक्रिया को निर्वाण कहा जाता है। महात्मा बुद्ध का निर्वाण भी उनके जन्म दिवस के दिन ही हुआ था। कहा जाता है कि उनका निर्वाण एक बोधी वृक्ष के नीचे ध्यान की मुद्रा में हुआ था। अतः बुद्ध जयंती को ‘वेसाक उत्सव’ के रूप में भी मनाया जाता है।

बुद्ध पूर्णिमा के दिन गंगा स्नान का भी है महत्व

बुद्ध पूर्णिमा एक पावन त्योहार माना जाता है इस त्योहार को शांति और अहिंसा का प्रतीक माना जाता है। बौद्ध धर्म और हिन्दू धर्म की मान्यताओं के अनुसार इस दिन गंगा स्नान का विशेष महत्व माना जाता है। लेकिन इस बार कोरोनावायरस के कारण देश में लॉकडाउन होने की वजह से सरकार ने सभी त्योहारों को घर पर रहकर ही मनाने के निर्देश दिए हैं। अतः इस बार बौद्ध पूर्णिमा के दिन गंगा स्नान करना उचित नहीं होगा।

बुद्ध पूर्णिमा शुभ मुहूर्त, पूजा विधि

अधिकतर भारतीय त्योहारों की तरह बुद्ध पूर्णिमा को भी भारीय पंचांग के अनुसार ही मनाया जाता है। बुद्ध पूर्णिमा भारतीय पंचांग के अनुसार वैशाख महीने की पूर्णिमा को आती है। वही अगर ग्रेगोरियन कैलेंडर की बात की जाए तो इस त्योहार को अप्रेल या मई में मनाया जाता है। साल 2020 में इस त्यौहार को 7 मई को सेलेब्रेट किया जाएगा। इस बार बुद्ध पूर्णिमा की तिथि 6 मई के दिन शाम 7 बजकर 44 मिनट से प्रारम्भ होकर 7 मई के 4 बजकर 14 मिनट तक रहेगी।

क्या करें?
  • सूरज उगने से पहले जागें और पूरे घर की सफाई करें।
  • इस दिन गंगा स्नान का विशेष महत्व होता है या फिर सादे पानी से नहाकर गंगाजल का भी छिड़काव कर सकते हैं ।
  • अपने घर के मंदिर में भगवान विष्णु जी के सामने दीपक जलाएं, पूजा अर्चना करें और पूरे घर को फूलों से सजाएं।
  • अपने घर के मुख्य द्वार पर रोली, हल्दी या कुमकुम से स्वस्तिक का चिह्न बनाना चाहिए और गंगाजल का छिड़काव करना चाहिए ।
  • बोधिवृक्ष के आस-पास दीपक जलाएं, उसकी जड़ों में दूध तथा फूल चढ़ाएं।
  • रोशनी ढलने के पश्चात उगते चंद्रमा को जल अर्पण कीजिये।
  • इसके अलावा घर में कोई पक्षी हो तो उन्हें आज़ाद करें।
  • गरीबों को भोजन खिलाएं और कपड़े दान करें।
क्या ना करें?
  • इस दिन मांस का सेवन करने से बचें।
  • घर में किसी भी तरह का कलह करने से बचें।
  • किसी का दिल ना दुखाएं और अपशब्द ना कहें।
  • इस दिन झूठ बोलने से बचें।

भगवान विष्णु का अवतार थे महात्मा बुद्ध

महात्मा बुद्ध को हिन्दू धर्म के सर्वोच्च देवताओ में शामिल श्रीहरि अर्थात भगवान विष्णु का अवतार माना जाता है। कहा जाता है बुद्ध रूप भगवान विष्णु ने इसलिए धारण किया क्योंकि वह संसार में शांति और अहिंसा का प्रचार करना चाहते थे। आज बुद्ध के प्रचारक और अनुयायी पुरी दुनिया में मौजूद है और बुद्ध के सिद्धांतो को पूरे विशब में अपनाने की बात कही जाती है।

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