Saturday, January 22, 2022
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Holi Date & Shubh Muhurat 2021: कब है होली, जानिए होलिका दहन की तिथि, शुभ मुहूर्त और पौराणिक कथा

Holi Date & Shubh Muhurat 2021: फाल्गुन मास की पूर्णिमा को होली का पर्व मनाया जाता है। होली का उत्सव पूरे भारवर्ष में हर्ष और उल्लास के साथ मनाया जाता है। इसे बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है। होली की सबसे ज्यादा धूम भगवान श्री कृष्ण के पावन धाम ब्रजमंडल में देखने को मिलती है। यहाँ बसंत पंचमी की तिथि से ही होली के उत्सव की धूम धाम शुरू हो जाती है। इसके अलावा बरसाना की लट्ठमार होली पुरे देश में लोकप्रिय है। मध्यप्रदेश के अलावा अंचल में होली के पांचवे दिन रंगपंचमी खेली जाती है। महाराष्ट्र के लोग होली के दिन एक दूसरे को सूखे गुलाल लगाते हैं। इस साल होली का पर्व 29 मार्च सोमवार को मनाया जायेगा और होलिका दहन 28 मार्च को किया जायेगा। होली के 8 दिन पहले यानि 22 मार्च से ही होलाष्ठक लग जायेगा। मान्यता है कि होलाष्ठक के दौरान शुभ कार्य वर्जित होते हैं।

जानिए होलिका दहन का शुभ मुहूर्त 

  • होलिका दहन शुरू: 28 मार्च (रविवार)
  • होलिका दहन का शुभ मुहूर्त: शाम 6: 36 से रात 8: 56 बजे

जानिए होली से जुड़ी पौराणिक कथा

पुराणों में होली से जुड़ी अनेक कथाएं मौजूद हैं। कहा जाता है कि असुरराज हिरण्यकश्यप का पुत्र प्रह्लाद भगवान विष्णु का परम भक्त था परन्तु हिरण्यकश्यप लोगों से अपने आप को भगवान बुलवाता था और प्रह्लाद से भी जोर जबरदस्ती करता था। इसलिए बालक प्रह्लाद को भगवान विष्णु की भक्ति करने के कारण वह उसे बार बार दंड देता रहता था। एक बार असुर हिरण्यकश्यप ने भक्त प्रह्लाद को मारने के उद्देश्य से अपनी बहन होलिका को सौंप दिया। उसके पास यह वरदान था कि अग्नि उसके शरीर को नहीं जला सकती है। इसी वरदान का लाभ उठते हुए होलिका ने बालक प्रह्लाद को अपनी गोद में बैठकर अग्नि में प्रविष्ट हो गई। भक्त प्रह्लाद की भक्ति के प्रताप और भगवान श्री हरी की कृपा के फलस्वरूप खुद होलिका आग से जल कर भस्म हो गई परन्तु बालक प्रह्लाद के शरीर जो अग्नि टस से मस भी ना कर सकी। तभी से लेकर आज तक होली का उत्सव मनाया जाने लगा।

Holi Date

इस तरह से किया जाता है होलिका दहन 

जिस जगह पर होलिका दहन किया जाना है वहां पर कुछ दिनों पहले एक सूखा पेड़ रखा जाता है। होलिका दहन के दिन उस पर लकड़ियां, घास, पुआल और गोबर के उपले रखे जाते हैं और उसमे आग लगाई जाती है। होलिका दहन के पवन उपलक्ष्य में परिवार के वरिष्ठ सदस्य से ही अग्नि प्रज्वलित करवानी चाहिए। होलिका दहन के अगले दिन रंग गुलाल लगाकर होली का पर्व मनाया जाता है।

Riya Pant
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