Tuesday, October 19, 2021
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WMCC क्या है? और यह भारत-चीन विवाद से कैसे जुड़ा है?

All You Need to Know About WMCC: भारत और चीन के रिश्ते शुरुआत से ही कुछ ठीक नहीं रहे हैं। पिछले कुछ समय में इन रिश्तो की खटास साफ नज़र आयी है। सीमाओं को लेकर चीन और भारत में गतिरोध देखा जा सकता है। पिछले साल दोनों देशों के बीच डोकलाम विवाद हुआ जो करीब 73 दिन चला। उस बात को एक साल पूरा हुआ ही नहीं कि अब गलवन घाटी को लेकर विवाद शुरू हो गया। शुरुआत में दोनों देशों की सेनाए डटी रही लेकिन आखिर में भारत की कूटनीति के कारण चीन को अपने कदम पीछे लेने पड़े।

चीन और भारत के सीमा विवाद को सुलझाने के लिए बनाया गया था WMCC

चीन और भारत में सीमाओं को लेकर अक्सर विवाद होते रहते हैं। चीन भारत के कई इलाको पर काफी पहले से अपना हक बताता आ रहा है। चीन की यही खराब नियत दोनों देशो के बीच लगातार विवाद पैदा करती है। इस कारण से सीमाओं पर हमेशा तनावपूर्ण हालात बने रहते हैं। दोनो देशो के बीच होने वाले विवादित मुद्दों को सुलझाने के लिए एक ऐसा तंत्र बनाने की मांग ररखी गयी जो इन मुद्दों को सुलझा सके। इसी तरह से WMCC (डब्ल्यूएमसीसी) का जन्म हुआ।

आखिर क्या है यह WMCC (डब्ल्यूएमसीसी)

जब से भारत और चीन के बीच के विवाद शुरू हुए हैं तब से WMCC सुर्खियों में बना हुआ है। जो लोग इसके बारे में नहीं जानते हैं वह इसे लेकर कंफ्यूज हैं। दरअसल WMCC एक 2012 में स्थापित किया गया संस्थागत तन्त्र है। WMCC की फुल फॉर्म ‘वर्किंग मैकेनिज्‍म फॉर कंसलटेशन एंड कॉर्डिनेशन’ हैं। यह एक ऐसा कार्य तंत्र हैं जिसमें परामर्श और समन्वय के द्वारा विवादों को सुलझाया जाता है।

क्या है WMCC का महत्व?

WMCC एक ऐसी संस्था है जहां पर चीन और भारत के बीच में कोई भी विवाद होने पर उस विवाद को पेश किया जाता है। दोनों देशों के तथ्यों और दावों को सुना जाता है और समझा जाता है। अंत में समन्वय और परामर्श के द्वारा फैसला किया जाता है। WMCC पहले भी कई बार चीन और भारत के बीच शांति स्थापित करने में अपना एक अलग महत्व निभा चुका है। पिछले साल हुए डोकलाम विवाद में भी WMCC की मदद से दोनों देशो के बीच के विवादों को निपटाया गया था।

WMCC और डोकलाम विवाद

साल 2017 के जून में चीन ने डोकलाम में अवैध रूप से सड़क बनाने की कोशिश की। भारतीय आर्मी के सेनिकों ने चीनी जवानों को यह काम करने से रोका। चीन दावा करने लगी की यह इलाका उनके क्षेत्र में है। विवाद के करीब ढाई महीने बाद WMCC की बैठक हुई जहां दोनों देशों की बातें सुनी गई। भारत ने सबूतों और तथ्यों से चीन के फर्जी दावों की धज्जियां उड़ा दी। इस बैठक में भारत की तरफ से विदेश मंत्रालय के संयुक्त सचिव प्रणय वर्मा थे।

इस विवाद को लेकर पहली मीटिंग बीजिंग में हुई और दूसरी मीटिंग नई दिल्ली में हुई थी। इसके बाद तीसरी मीटिंग चीन के चेंगदु शहर में मानी जाती हैं। WMCC ने इस मुद्दे को सुलझाने में मदद की। साल 2017 के बाद अब एक बार फिर वुवाद हुआ हैं और WMCC इस बार भी विवाद को सुलझाने की कोशिश कर रहा हैं।

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