पॉलिसीधारकों को राहत, बढ़ी बीमा की प्रीमियम भरने और पॉलिसी रिन्यू कराने की तिथि

Govt Gave Relief To Policyholders For Renewal: कोरोना वायरस के वजह से दुनिया के कई देशों की रफ्तार रुक सी गई है। इस वायरस ने जहां लाखों लोगों को अपने चपेट में लिया है तो वहीं इसने अर्थव्यवस्था पर भी बहुत बड़ा प्रभाव डाला है। इस वायरस की वजह से दुनिया के करोड़ों लोगों की रोजगार छीन जाने की बात भी कही जा रही है। कई कल कारखाने बंद हो गए हैं। भारत भी इस प्रभाव से अछूता नहीं है। इसी बीच इस परिस्थिति को देखते हुए भारत सरकार ने पॉलिसीधारकों को थोड़ी राहत दी है। जो कि बीमा का प्रीमियम भरने और पॉलिसी रिन्यू कराने के संबंध में है।

इस संबंध में वित्त मंत्रालय के ऑफिशियल टि्वटर हैंडल से एक ट्वीट किया गया है। जिसमें यह लिखा गया है कि #COVID19 लॉकडाउन के दौरान उन पॉलिसीधारकों के लिए कठिनाई को कम करने के लिए सरकार ने इसकी तिथि को बढ़ा दिया है। जो लोग स्वास्थ्य और मोटर (थर्ड पार्टी) बीमा पॉलिसी नवीनीकरण कराना चाहते हैं उनके लिए केंद्रीय सरकार ने अधिसूचना जारी की है। केंद्र सरकार ने ऐसे पॉलिसीधारकों को 15 मई तक प्रीमियम भुगतान करने की अनुमति दी है।

मालूम हो कि सरकार ने 20 अप्रैल से कुछ चुनिंदा सेक्टर में शर्तों के साथ छूट देने की बात कही है। सरकार की तरफ से कहा गया है कि अगर हालात संतोषजनक रहें तो कोरोना फ्री इलाकों में कुछ छूट दिए जा सकते हैं। लेकिन यह भी कहा गया है कि कोरोना वायरस के वजह से यदि हालात सामान्य नहीं होंगे तो छूट वापस ले लिया जाएगा। सरकार के इस फैसले का एसोचैम और उद्योग जगत ने स्वागत किया है। अभी फिलहाल देश में तीन मई तक लॉकडाउन हैं।

मीडिया रिपोर्ट की माने तो मौजूदा समय में अर्थव्यस्था को प्रतिदिन करोड़ों का नुकसान पहुँच रहा है। इस संबंध में जबकि एसोचैम (ASSOCHAM) के राष्ट्रीय अध्यक्ष हीरानंदानी ने भी बुधवार को एक बयान जारी किया है। जिसमें उन्होंने यह कहा है कि कोरोना वायरस के वजह से उतपन्न हुए मौजूदा हालत की वजह से रोजाना अर्थव्यवस्था को ₹26000 का नुकसान पहुंचने का अनुमान है। ऐसे में थोड़ी छूट का फैसला सही है।

इधर फिक्की की अध्यक्ष डॉ संगीता रेड्डी ने एक बयान जारी किया है। फिक्की अध्यक्ष ने अपने बयान में यह कहा, “अब ये जरूरी होगा कि सरकार एक राहत और आर्थिक प्रोत्साहन पैकेज की घोषणा करे, जिससे रोजगार और कारोबार की सुरक्षा बहाल रखी जा सके।”

गैरतलब हो कि इन दिनों औद्योगिक क्षेत्रों में ताला लगा हुआ है। निजी सेक्टर में कामकाज भी ठप है। रोजाना काम करके पैसे कमाने वाले लोगों की आर्थिक स्थिति को लेकर भी मौजूदा समय में चुनौती खड़ी हो गई है। इन लोगों में ज्यादातर दिहाड़ी मजदूर शामिल है, जो रोज काम करके पैसे कमाते हैं और उसी पैसे से अपने घर को चलाते हैं। हालांकि सरकार का यह कहना है कि इस दिशा में काफी प्रयास किया जा रहा है। सरकार ऐसी कोशिश कर रही है कि देश में रहने वाले किसी भी व्यक्ति को भूखा न सोना पड़ें और सबको दो वक्त का भोजन मिल सकें।

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