Tata Sons Picks Up Stake In AirAsia India: एयर एशिया इंडिया की 83.67 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदने वाला है टाटा संस, पढ़ें पूरी केस स्टडी

Tata Sons Picks Up Stake In AirAsia India: टाटा भारत की सबसे बड़ी और विश्वसनीय कंपनियों में से एक है। टाटा का साम्राज्य रिलायन्स जैसी कंपनियों से भी काफी बड़ा है। टाटा कुछ क्षेत्रों को छोड़कर अन्य सभी क्षेत्रों में काम कर रही है, और अच्छा प्रॉफिट बना रही है। हाल ही में कंपनी की तरफ से एक नई खबर सुनने को आई है जिसने फाइनेंस के क्षेत्र में रुचि रखने वाले लाखों लोगों को हैरान कर दिया है। दरअसल टाटा AirAsia India की 83.67 प्रतिशत भागीदारी खरीदने वाली है। एयर एशिया मलेशिया की एयरलाइंस है जो भारत में टाटा के साथ मिलकर काम करती है। AirAsia India दोनों कंपनियों का एक जॉइन वेंचर हैं। वर्तमान में AirAsia India पर टाटा का 51 प्रतिशत तक अधिकार है जिसे जल्द ही 83.67 प्रतिशत तक बढ़ाया जाएगा।

एयर एशिया इंडिया के शेयर्स क्यों खरीद रही है TATA?

वर्तमान में Tata के पास AirAsia की 51 प्रतिशत हिस्सेदारी और एयर एशिया बरहाद के पास 49 प्रतिशत हिस्सेदारी है। लेकिन इस डील के पूरा होने के बाद टाटा के पास एयर एशिया इंडिया की 83.67 प्रतिशत हिस्सेदारी आ जायेगी। इसका सबसे बड़ा कारण तो यह है कि एयर एशिया बरहाद अपने भारतीय कारोबार से निकलना चाहता है और दूसरा बड़ा कारण यह है कि टाटा एयर इंडिया के लिए कम्पनी को तैयार करना चाहती है। बता दें कि टाटा सन्स ने सिंगापुर एयरलाइंस को भी निवेश के लिए राजी कर लिया है। बता दें कि टाटा काफी पहले से ही एयर एशिया इंडिया की हिस्सेदारी खरीदना चाहती थी और अब आख़िरकार यह सम्भव हो रहा है।

एयर इंडिया को खरीदने में टाटा की दिलचस्पी

टाटा भारत की उन कंपनियों में से एक है जिनका काफी बड़ा साम्राज्य है और यह लगातर अपने बिज़नेस के विस्तार में ध्यान रखे हुए है। 14 दिसम्बर को टाटा संस ने एयर इंडिया को खरीदने में दिलचस्पी दिखाई थी। मगर अब तक एयर इंडिया बिकने को तैयार नही है। ऐसे में टाटा के पास एक बेहतरिन विकल्प है। टाटा एयर एशिया इंडिया को मदनयम बनाकर उससे बोली लगवा सकता है जिससे कि डील होने में आसानी रहेगी। एयर इंडिया की बोली में एयर इंडिया एक्सप्रेस के साथ इसकी इकाइयां भी शामिल है। यह डील टाटा के लिए प्रॉफिटेबल साबित होगी। भारत में एयर एशिया ग्रुप को काफी नुकसान भी हो रहा है जिसके चलते कंपनी भारत से बाहर निकलना चाहती है।

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