GST Compensation Shortfall: राज्यों की तरफ से, जीएसटी की क्षतिपूर्ति करने के लिए केंद्र सरकार लेगा 1.1 लाख करोड़ का लोन

GST Compensation Shortfall: केंद्र सरकार अर्थव्यवस्था को वापस पटरी पर लाने के लिए एक से बढ़कर एक बड़े फैसले ले रही हैं। हाल ही में वित्त मंत्रालय ने एक महत्वपूर्ण बयान दिया जिसमें कहा गया कि केंद्र सरकार राज्यों के जीएसटी की कमी को पूरा करने के लिए 1.1 लाख करोड़ का लोन लेगी। वित्त मंत्रालय ने इस बात की जानकारी दी है। यह केंद्र और राज्यों के बीच GST विवाद को सुलझाने की दिशा में एक अहम कदम भी माना जा रहा है। कोविड-19 महामारी (Covid-19) के चलते इस बार अर्थव्यवस्था में जीएसटी कलेक्शन की कमी रही। जिस वजह से राज्यों का बजट गड़बड़ाया हुआ है।

जीएसटी की कमी की भरपाई के लिए केंद्र सरकार लेगी 1.11 लाख करोड़ का लोन

हाल ही में वित्त मंत्रालय ने गुरुवार को एक बयान जारी किया है जिसमें बताया गया कि राज्यों की जीएसटी की कमी की भरपाई करने (GST Compensation Shortfall) के लिए केंद्र सरकार 1.11 लाख करोड़ का कर्ज उठाएगी। लोन ली जाने वाली राशि को राज्यों में आगे बढा दिया जाएगा। बता दें कि इस राशि को उन्हें जीएसटी कंपेन्सेशन सेस रिलीज के बदले में एक के बाद एक लोन के तौर पर दिया जाएगा। यानी कि अगर देखा जाए तो एक तरह से अर्थव्यवस्था (Economy) को पटरी पर लाने के लिए और अनलॉक प्रक्रिया (Unlock Phase) को अधिक लाभदायक बनाने के लिए यह कदम उठाया जा रहा है।

GST Compensation Shortfall

GST Compensation Shortfall: अगस्त में राज्यों को सरकार ने दिये थे 2 विकल्प

काफी सारे लोगों को इस बात का ध्यान नहीं होगा कि अगस्त के महीने में कोरोना के कारण हुए नुकसान की वजह से केंद्र ने राज्यों को दो विकल्प दिए थे, जिससे कि जीएसटी में कमी की भरपाई की जा सके। पहले विकल्प में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) से 97,000 करोड़ रुपए कर्ज लेना था, तो दूसरे विकल्प में बाजार से 2.35 लाख करोड़ रुपए का कर्ज लेना था। राज्य सरकार ने पहले विकल्प को चुना, लेकिन कुछ राज्यों की मांग के कारण 97000 करोड़ रुपये की राशि को बढ़ाकर 1.11 लाख करोड़ रुपये कर दिया गया। बता दें कि उधारी चुकाने के लिए लग्जरी के साथ सिगरेट, बीड़ी, शराब और गैर जरूरी सामानों पर आदि पर लगने वाले नुकसान भरपाई सेस को 2022 के बाद भी लगाने का प्रस्ताव है।

किस्तों में कर्ज के तौर पर मिलेगा पैसा

देश के वित्त मंत्रालय के द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार विशेष व्यवस्था के तहत सभी राज्यों को केंद्र सरकार 1.11 करोड़ रुपये की राशि किश्तों में कर्ज के रूप में देगी। बता दें कि इस राशि को राज्य सरकारों के कैपिटल रिसीट के रूप में दिखाया जाएगा जिससे कि सरकार के राजकोषीय घाटे पर कोई असर नहीं होगा। 21 राज्य अब तक 78 हजार 542 करोड़ रुपए के कर्ज के लिए सहमत हो चुके हैं, जिनमे आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम आदि शामिल हैं।

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