क्या है हाइब्रिड वारफेयर? चीन कैसे और क्यों कर रहा है भारतीयों की साइबर जासूसी?

China Hybrid Warfare India: इस समय लद्दाख बॉर्डर पर हुए चीन और भारत के सेनिकों के बीच में विवाद के चलते दोनों देशों के बीच के रिश्ते बिगड़ से गए हैं। देखा जाए तो चीन के साथ हमारे रिश्ते शुरुआत से ही कुछ खास नहीं रहे हैं। पाकिस्तान भारत का दुश्मन है, और चीन पाकिस्तान का दोस्त। इस समय चीन और भारत के बीच झगड़े के चलते इलेक्ट्रॉनिक्स और इंफर्मेशन टेक्नोलॉजी मंत्रालय ने चीन के कई एप्प्स को बैन कर दिया है। अब तक 224 से भी अधिक एप्प्स को बैन किया जा चुका हैं। हाल ही में खबरें सामने आयी है कि चीन भारत के महत्वपूर्ण लोगों और संस्थाओ पर नज़र रख रहा है

क्या है हाइब्रिड वारफेयर और क्या चाहता है चीन? 

साल 1999 के शुरू में चीन के पीपुल्‍स लिबरेशन आर्मी ने हाइब्रिड वारफेयर के लिए ‘असीमित युद्धकौशल’ नाम से एक रणनीति बनायीं जिसका उद्देश्य हिंसा को सेना से ले जाकर नेताओं, अर्थव्‍यवस्‍था और तकनीक की दुनिया में शुरू करना था। इस नए युद्ध में मास्टरमाइंड चीन के चीन के कर्नल कीआओ लिआंग और कर्नल वांग शिआंगसूई मौजूद थे। हाइब्रिड वारफेयर के जरिये चीन अपने दुश्मन देश में सामाजिक विद्वेष बढ़ा रहा है, और आर्थिक गतिविधियों में दखल अंदाजी कर रहा है, साथ ही सभी संस्‍थाओं को खोखला को खोखला करने की कोशिश कर रहा है। इसके साथ ही राजनितिक नेतृत्‍व और उसकी क्षमता को कमजोर कर रहा है।

What Is Hybrid Warfare why and How Does China Monitoring in India

इन लोगों पर है चीन की नजर

हाल ही में भारत के एक अंग्रेजी न्यूज़पेपर ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ ने एक इन्वेस्टीगेशन की, जिसमें यह पता चला कि चीन भारत के 10 हजार महत्वपूर्ण लोगों और संस्थाओ पर नज़र रख रहा है, जिसमें देश के प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति, कई बड़े राजनेता और व्यापारी शामिल हैं। दरअसल चीन सरकार से जुड़ी एक कम्पनी भारत के हजारों महत्वपूर्ण लोगों के यूज़र्स के डाटा को चुरा रही है, और उसे एनालाइज कर रही है। यह देश के लिए एक बड़ा खतरा बन सकता है। इस कम्पनी का नाम ‘शिन्हुआ डेटा इंफर्मेशन टेक्नोलॉजी’ है, जो भारत के महत्वपूर्ण लोगों का डेटा चुरा रही है।

शिन्हुआ डेटा कंपनी किसे और क्यों ट्रैक कर रही है? 

चीन भारत के महत्वपूर्ण और प्रमुख लोगों को ट्रेक कर रहा है। चीन की कम्पनी शिन्हुआ डेटा इंफर्मेशन टेक्नोलॉजी के द्वारा ट्रेक किये जाने वाले लोगो में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राष्ट्रपति रामनाथ कोलिंद, सोनिया गांधी, राहुल गाँधी, शिवराज सिंह चौहान और अशोक गहलोत जैसे नेता और कई केंद्रीय मंत्री शामिल हैं। इसके अलावा चीन तीनों सेनाओ के प्रमुख लोगों को भी ट्रेक कर रही है। इतना ही नहीं बल्कि कई बड़े बिजनेसमैन जैसे की रतन टाटा आदि पर भी नज़र रखी जा रही है। और इस ट्रैकिंग का मुख्य उद्देश्य भारत के राजनीतिक ढांचे में घुसपैठ करना है ताकि भारत के मुकाबले में उसे अपर हैंड मिल सके।

 

कैसे कर रहा है चीन भारतीयों को ट्रेक?

चीनी सरकार से जुड़ी शिन्हुआ डेटा इंफर्मेशन टेक्नोलॉजी कम्पनी खुद को थ्रेट इंटेलिजेंस सर्विसेस बताती है। इस कम्पनी का मुख्य काम अपने क्लाइंट्स की विरोधियों का साइबर टूल्स के माध्यम से जानकारी निकालना है। यह कम्पनी सोशल मीडिया, सरकारी दस्तावेज और अन्य तरीकों से क्लाइंट्स की जानकारी निकालती है। कई बार ऐसी कम्पनियाँ क्लाइंट्स की गुप्त जानकारियाँ निकालने के लिए हैकिंग जैसे माध्यमों का इस्तेमाल भी करती है।

भारतीयों की ट्रेकिंग के पीछे क्या है चीन का मकसद?

अगर चीन भारत के महत्वपूर्ण लोगों और राजनेताओं को ट्रैक कर रहा है तो इसके पीछे जरूर कोई न कोई मकसद है। हो सकता है कि चीन भारत के राजनीतिक ढांचे में घुसपैठ करना चाहता हो। इससे चीन को भारत से मुकाबला करने में काफी मदद मिल जाएगी। भारत के कमजोर मुद्दों पर चीन हमला करके जीत सकेगा। इस प्रकार की कम्पनियाँ मुख्यतः क्रिमिनल्स को पकड़ने का काम करती है लेकिन यह मामला कुछ अलग है। चीन भारत की कमजोरियों को पकड़ना चाहता है ताकि वह मुकाबले में आगे रह सके।

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