What Is Reverse Repo Rate?: ये हैं रिवर्स रेपो रेट में कटौती के फायदे और नुकसान

What Is Reverse Repo Rate: इस वक्त कोरोना महामारी के वजह से दुनिया के लाखों लोग जिंदगी और मौत की जंग लड़ रहें हैं। कोरोनावायरस जहां इंसानों के लिए बड़ा खतरा बनकर समाने आया है तो वहीं इसने अर्थव्यवस्था को भी चौपट कर दिया है। अर्थव्यस्था पर कोरोना की मार का असर भारत पर भी पड़ा है। कोरोना के कारण ही यहां आर्थिक क्षेत्र से जुड़े सारे काम काज करीब एक महीने से ठप है।

इसी स्थिति को देखते हुए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने कई अहम फैसले लिए हैं। जिसकी जानकारी शुक्रवार को RBI गवर्नर शक्तिकांत दास ने दी। इस दौरान RBI गवर्नर ने रिवर्स रेपो रेट (Reverse Repo Rate) में भी कटौती का भी ऐलान किया। RBI द्वारा रिवर्स रेपो दर में 0.25 प्रतिशत कटौती करने का निर्णय लिया गया है।

अब रिवर्स रेपो रेट 0.25 प्रतिशत से घटाकर 3.75 प्रतिशत कर दिया है, जिसे तत्काल प्रभाव से लागु भी कर दिया गया है। बैंकिंग और इकॉनमी के क्षेत्र में ‘रिवर्स रेपो रेट’ के एक बहुत की कॉमन नाम हैं। हालांकि आम लोगों में से कइयों को इसके बारे में जानकारी नहीं है। तो चलिए आज अहम इस संबंध में सबकुछ विस्तार जानते हैं।

What Is Reverse Repo Rate: क्या होता है रिवर्स रेपो रेट?

बैंक में जाकर रोजाना लाखों ग्राहक अपने पैसे की निकासी करते हैं। जबकि कई ग्राहकों द्वारा पैसों को जमा भी किया जाता है। साथ ही बैंक द्वारा अन्य तरह की लेनदेन भी की जाती है। प्रतिदिन इन जमा निकासी के बाद जो भी रकम बैंकों के पास बच जाती है, उसे उस बैंक द्वारा भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) में रख दिया जाता है। RBI इन रकम पर बैंकों को ब्याज भी देता है। बैंक द्वारा जमा किये गए इस रकम पर RBI जिस दर से ब्याज देता है उसे ही ही रिवर्स रेपो रेट कहा जाता है।

रिवर्स रेपो रेट में कटौती से फायदा और नुकसान 

रिवर्स रेपो रेट में कटौती के कारण अब बैंकों को रिजर्व बैंक द्वारा कम इंटरेस्ट रेट मिलेगा। जिसके बाद बैंक अपने पैसों को रिजर्व बैंक में कम ही जमा करने के पक्ष में होंगे। इससे बैंकों के पास नगदी की संख्या की बढ़ोतरी हो जाएगी। इस दौरान बैंक अर्थव्यवस्था (प्रोडक्शन से जुड़े क्षेत्र) से जुड़े हुए क्षेत्रों को अधिक से अधिक कर्ज दे सकेंगे। बैंक रिजर्व बैंक में पैसे को जमा करने के बजाए अधिक लोगों लोन को बांटकर ज्यादा ब्याज कमा सकते हैं। ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए बैंक लोन के ब्याज दरों में कटौती भी कर सकता है।

इस संबंध में जानकारी देते हुए RBI गवर्नर शक्तिकांत दास ने यह कहा, “महामारी के प्रकोप के दौरान सामान्य कामकाज सुनिश्चित करने के लिए बैंकों, वित्तीय संस्थानों ने विशेष तैयारी की हैं। भारत के लिए आईएमएफ का जीडीपी वृद्धि अनुमान 1.9 प्रतिशत है, जो जी20 देशों में सबसे अधिक है। इसके अलावा RBI गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था के 2021-22 में वापसी करने के आसार है।”

उन्होंने ने आगे यह भी कहा, “केंद्रीय बैंक के कदमों से बैंकिंग प्रणाली में नकदी की स्थिति में सुधार आया है, यह बढ़ी है। आरबीआई प्रणाली में पर्याप्त तरलता बनाए रखने, बैंक ऋण प्रवाह को आसान बनाने, वित्तीय दबाव को कम करने के लिए नए उपायों की घोषणा करेगा।”

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